शिविका झरोखा डॉट कॉम की स्थापना के जुलाई—अगस्त 2025 में 25 महीने पूरे हुए थे। इस विशेष अवसर पर हमने अपने रीडर्स, राइटर्स व शुभचिंतकों से इस विषय पर उनके विवार व अनुभव आमंत्रित किए थे—
”शिविका झरोखा डॉट कॉम से मेरे जीवन में हुए बदलाव”
हमें यह देखकर प्रसन्नता हुई कि इस टॉपिक पर सबने हमारी खूबियों, खामियों एवं खट्टे—मीठे अनुभवों को निस्संकोच व्यक्त किया। हम अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करते हैं। अत: इन विचारों को ससम्मान और बहुत मामूली—सा एडिट करके प्रकाशित करने जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रत्येक प्रकाशित विचार को भेजने वाले 250 रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि पाने के हकदार हो गए हैं। उन्हें यह राशि 30 दिसंबर 2025 तक भेज दी जाएगीं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने से लेकर रचना प्रकाशन व प्रोत्साहन राशि अदा करने संबंधी तमाम प्रक्रिया बिलकुल नि:शुल्क रखी गई है। आइए इन विचारों को अब पढ़ें विस्तार से—
1. परिवर्तनशील चेतना का प्रतिबिंब
सुशी सक्सेना, इंदौर
“शिविका झरोखा डॉट कॉम” पत्रिका एक ऐसी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक खिड़की है, जिससे झांकने पर विचारों की नई दिशा, भावनाओं की ताजगी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनुभव होता है। जब मैंने इस पत्रिका से जुड़ाव बनाया, तो यह केवल एक पाठकीय अनुभव नहीं रहा, बल्कि आत्मिक और वैचारिक बदलाव का माध्यम बन गया।
इस पत्रिका की सबसे बड़ी खूबी इसकी विविधता है। इसमें कविता, लेख, संस्मरण, समाजिक मुद्दों पर विमर्श, सांस्कृतिक विमर्श, स्त्री-विमर्श और नवोदित रचनाकारों के लिए विशेष स्थान मिलता है। यहाँ केवल नामचीन लेखकों को नहीं, बल्कि नए कलमकारों को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जाती है, जिससे आत्मविश्वास का संचार होता है। साथ ही, इसका डिजिटल स्वरूप इसे समय के अनुकूल बनाता है, जिससे हम कहीं भी, कभी भी इसे पढ़ सकते हैं।
पत्रिका की भाषा सरल, सजीव और प्रभावी होती है। यह न केवल साहित्य प्रेमियों को जोड़ती है, बल्कि युवाओं में भी रचनात्मक अभिरुचि जगाती है। कई बार इसने मेरे भीतर दबे विचारों को शब्दों में ढालने की प्रेरणा दी। मैंने अपने लेख भेजे और उन्हें प्रकाशित होते देखकर जो आत्मिक संतोष मिला, वह शब्दों से परे है।
हालांकि कुछ खामियां भी महसूस हुईं। जैसे, तकनीकी पक्ष कभी-कभी धीमा या असुविधाजनक लगता है। कुछ लेखों का संपादन और भाषा शुद्धता बेहतर हो सकती थी। कभी-कभी विषयों की पुनरावृत्ति से नवीनता की कमी भी लगती है। लेकिन ये खामियां पत्रिका के संपूर्ण उद्देश्य को प्रभावित नहीं करतीं।
अनुभव की बात करें तो “शिविका झरोखा डॉट कॉम” ने मुझे अपने विचारों को खुले रूप में प्रस्तुत करने का मंच दिया। इसने मेरी लेखन यात्रा को नई दिशा दी, आत्म-मंथन और आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान किया। यह पत्रिका मेरे लिए एक संवाद है – खुद से, समाज से और समय से।
अंततः, यह पत्रिका न केवल साहित्य का झरोखा है, बल्कि एक परिवर्तनशील चेतना का प्रतिबिंब भी है। इसके माध्यम से मैंने पाया कि शब्दों में केवल भावनाएं नहीं, बल्कि बदलाव की शक्ति भी होती है। “शिविका झरोखा डॉट कॉम” मेरे लिए केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि प्रेरणा और परिवर्तन का माध्यम है।
(क्रमश:)