प्रथम पूजनीय देव की जनप्रिय कहानियां
(AI GENERATD CREATION)
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
मूषक—छोटा साथी, बड़ी शक्ति
“किसी की शक्ति उसके आकार से नहीं, उसके उद्देश्य से तय होती है।”
भगवान गणेश का वाहन मूषक है। पहली दृष्टि में यह बात आश्चर्यजनक लगती है—इतने विशाल और शक्तिशाली देवता का वाहन इतना छोटा क्यों?
इसके पीछे एक सुंदर प्रतीक छिपा है।
मूषक चंचल होता है। वह इधर-उधर दौड़ता है और छोटी-सी जगह में भी प्रवेश कर सकता है। मानव मन भी कुछ ऐसा ही है—विचार लगातार दौड़ते रहते हैं।
गणेश जी का मूषक पर बैठना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि बुद्धि और विवेक चंचल मन पर नियंत्रण रख सकते हैं।
एक दिन मूषक ने गणेश जी से कहा, “प्रभु, मैं इतना छोटा हूँ। लोग मुझे देखकर आपका मज़ाक उड़ाते होंगे।”
गणेश जी मुस्कुराए।
उन्होंने कहा, “छोटा होना कमजोरी नहीं है। तुम्हारे भीतर ऐसी विशेषताएँ हैं जो किसी बड़े प्राणी में नहीं।”
मूषक प्रसन्न हो गया।
उस दिन से उसने स्वयं को छोटा समझना छोड़ दिया।
शक्तिशाली संदेश:
अपने आकार, परिस्थिति या संसाधनों को अपनी सीमा मत समझिए। सही दिशा, सही सोच और सही उद्देश्य हो तो छोटा-सा साधन भी बड़े परिवर्तन का कारण बन सकता है।
(क्रमश:)