जादू की छड़ी नहीं, सकारात्मक सोच ही असली सुपरपावर है!
प्रस्तुति : शिखा तैलंग, भोपाल
…“मेरा मतलब है—तुम छड़ी से क्या कर सकते हो?”
हरिया ने छड़ी घुमाई।
“अभी तक तो कुछ नहीं।”
“तो तुम जादूगर कैसे हो?”
हरिया बोला,
“भाई, हमारे यहाँ आधे लोग बिना जादू की छड़ी के ही बिजली का बिल देखकर गायब हो जाते हैं।”
झरिया ने पहली बार महसूस किया कि यह भारतीय लड़का साधारण नहीं है।
पहली परीक्षा—उड़ने की कला
प्रोफेसर ने सभी विद्यार्थियों से कहा—
“अपनी झाड़ू पर बैठिए और उड़िए!”
सभी बच्चे उत्साहित हो गए।
झरिया ने झाड़ू पर बैठकर मंत्र पढ़ा—
“ऊँचा उड़!”
झाड़ू हवा में उठ गई।
हरिया ने अपनी झाड़ू देखी।
कुछ नहीं हुआ।
उसने फिर कहा—
“चल पुत्तर!”
झाड़ू चुप।
“ओए, उठ जा!”
झाड़ू फिर चुप।
हरिया ने झाड़ू को समझाते हुए कहा—
“देख बहन, तू उड़ जा। नहीं तो लोग कहेंगे कि पंजाब का छोरा झाड़ू तक नहीं उड़ा सकता।”
झाड़ू फिर भी नहीं उड़ी।
प्रोफेसर ने पूछा,
“क्या समस्या है?”
हरिया बोला,
“झाड़ू का माइंडसेट निगेटिव है।”
प्रोफेसर ने माथा पकड़ लिया।
हरिया ने झाड़ू को जमीन पर रखा और कहा—
“तू कर सकती है। तुझमें क्षमता है। तू उड़ने के लिए ही बनी है।”
अचानक—
फुर्रर्र!
झाड़ू हवा में उड़ गई!
पूरी कक्षा दंग रह गई।
झरिया ने पूछा,
“तुमने यह कैसे किया?”
हरिया बोला—
“पॉजिटिव मोटिवेशन।”
प्रोफेसर ने कहा,
“यह जादू नहीं है।”
हरिया मुस्कुराया—
“यही तो जादू है, सर!”
दूसरी परीक्षा—डरावना राक्षस
अगली परीक्षा में छात्रों को एक विशाल राक्षस के सामने खड़ा किया गया।
राक्षस इतना डरावना था कि कुछ विद्यार्थी भागने लगे।
(क्रमश:)
(AI GENERATED CREATION)
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