“गलत प्रॉम्पट, सही मनोरंजन — एआई के युग में एक बिंदी भी बदल सकती है जिंदगी!”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
मुन्ना का आत्मविश्वास थोड़ा डगमगाया…
लेकिन त्रिपाठी जी रुकने वाले नहीं थे।
उन्होंने तीसरा अध्याय खोला—
“तीसरा प्रेम गणित की कोचिंग में हुआ। मुन्ना को लगा कि प्रेम और बीजगणित दोनों में x का मूल्य कभी नहीं मिलता।”
अब स्वयं त्रिपाठी जी हंसते-हंसते कुर्सी पकड़ चुके थे।
पीछे बैठा पप्पू चिल्लाया—
“मुन्ना भाई! आपने तो पूरी प्रेम लीग खेल रखी है!”
मुन्ना को पहली बार लगा कि शायद कुछ गड़बड़ हो गई है।
लेकिन असली विस्फोट अभी बाकी था।
त्रिपाठी जी ने आगे पढ़ा—
“पांचवां प्रेम इसलिए समाप्त हुआ क्योंकि संबंधित युवती ने मुन्ना के ‘गुड मॉर्निंग’ संदेश पर केवल नीला टिक लगाया, उत्तर नहीं दिया।”
पूरी कक्षा में ऐसा ठहाका लगा कि पास वाली कक्षा के शिक्षक भी दौड़कर आ गए।
अब प्रधानाचार्य श्री दीनदयाल सक्सेना जी को बुलाया गया।
उन्होंने गंभीरता से पूरा लेख पढ़ा।
फिर अचानक पूछा—
“मुन्ना, यह दसवां प्रेम कौन था?”
मुन्ना लगभग रो पड़े।
“सर! मुझे तो पहला भी नहीं पता!”
अब पूरा स्टाफ रूम हंसी से गूंज उठा।
जांच समिति गठित की गई।
समिति में हिंदी शिक्षक, विज्ञान शिक्षक, कंप्यूटर शिक्षक और खेल शिक्षक शामिल किए गए।
तीन घंटे की जांच के बाद निष्कर्ष निकला—
“अपराधी मुन्ना नहीं, बल्कि गलत प्रॉम्पट है।”
यह सुनकर पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
ग्राम पंचायत की आपात बैठक बुलाई गई।
सरपंच जी ने घोषणा की—
“आज से गांव में बिना पढ़े कोई भी एंटर बटन नहीं दबाएगा।”
गांव के बुजुर्ग बोले—
“हम तो पहले ही कहते थे कि जल्दी का काम शैतान का होता है।”
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई।
घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
देखते ही देखते मुन्ना के लाखों फॉलोअर्स हो गए।
उन्हें विभिन्न संस्थानों से व्याख्यान देने के निमंत्रण आने लगे।
विषय था—
“दशमलव से दशम लव तक : प्रॉम्पट इंजीनियरिंग की चुनौतियां”
मुन्ना अब मंचों पर जाकर कहते—
“मित्रों, एआई कभी गलती नहीं करता। वह वही करता है जो हम उससे कहते हैं। समस्या मशीन में नहीं, हमारी जल्दबाजी में होती है।”
लोग तालियां बजाते।
फिर वे आगे जोड़ते—
“और यदि आप प्रेम पर शोध नहीं करना चाहते, तो कृपया दशमलव लिखते समय ‘ल’ और ‘व’ का विशेष ध्यान रखें।”
कुछ महीनों बाद राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में मुन्ना को सम्मानित किया गया।
उन्हें “भारत का प्रथम प्रॉम्पट सावधानी दूत” घोषित किया गया।
सम्मान ग्रहण करते समय उन्होंने कहा—
“मैंने जीवन में एक बात सीखी है—
गणित की गलती सुधारने में एक नंबर कटता है,
लेकिन प्रॉम्पट की गलती सुधारने में पूरा गांव हंसता है।”
पूरा सभागार तालियों और ठहाकों से गूंज उठा।
आज भी जब मुन्ना कोई प्रॉम्पट लिखते हैं, तो उसे पांच बार पढ़ते हैं, फिर अपने पिता को दिखाते हैं, फिर पड़ोसी को दिखाते हैं और अंत में भगवान का नाम लेकर एंटर दबाते हैं।
और यही इस कहानी का सकारात्मक संदेश है—
तकनीक जितनी तेज होगी, इंसान को उतना ही धैर्यवान, सावधान और हास्यप्रिय होना पड़ेगा। क्योंकि जिंदगी में कभी-कभी सबसे बड़ी सीख एक छोटी सी टाइपिंग गलती ही दे जाती है।
(एआई जनित काल्पनिक रचना)
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