“हर रचना एक नई आशा, हर शब्द एक नई दिशा!”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
सबका साथ, सबका विकास: एक सकारात्मक साहित्यिक यात्रा के तीन सफल वर्ष
यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक सकारात्मक प्रतीक भी है कि SHIVIKAJHAROKHA.COM की स्थापना 7 जुलाई 2023 को हुई। उस दिन की तिथि में भी सात, महीने में भी सात और वर्ष 2023 के अंकों का योग भी सात ही था। भारतीय संस्कृति में सात का अंक पूर्णता, संतुलन और शुभता का प्रतीक माना जाता है। शायद यही कारण है कि इस मंच की स्थापना भी एक ऐसे उद्देश्य के साथ हुई, जिसका केंद्र केवल साहित्य नहीं, बल्कि सकारात्मक परिवर्तन की भावना थी।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के विचार से प्रेरित यह मंच समाज के प्रत्येक वर्ग तक सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और साहित्यिक चेतना पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रतिदिन प्रकाशित होने वाली प्रेरणादायक, साहित्यिक और सामाजिक रचनाओं के माध्यम से यह मंच आम और खास, दोनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है।
भोपाल जैसे अपेक्षाकृत छोटे शहर से प्रारंभ हुई यह डिजिटल यात्रा आज भारत के लगभग सभी हिंदी और अहिंदी भाषी राज्यों तक पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं, इसके पाठक और प्रशंसक भारत की सीमाओं से बाहर अमेरिका, अफ्रीका, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, आयरलैंड, स्वीडन, सिंगापुर और अनेक अन्य देशों में भी मौजूद हैं। यह बढ़ता हुआ वैश्विक परिवार हमें और अधिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
एक निजी संघर्ष से जन्मी सकारात्मक पहल
SHIVIKAJHAROKHA.COM की नींव में केवल तकनीक या साहित्य नहीं, बल्कि एक गहरा व्यक्तिगत अनुभव और भावनात्मक संघर्ष भी समाहित है।
इस वेबसाइट की स्थापना से कुछ समय पूर्व मेरे पति श्री विनोद तैलंग के क्रॉनिक किडनी रोग से पीड़ित होने का पता चला। जीवन के उस कठिन दौर में, जब परिस्थितियाँ निराशा और चिंता से घिरी हुई थीं, तब उन्होंने मेरे लेखन के प्रति मेरे लगाव को समझते हुए एक ऐसा मंच बनाने की प्रेरणा दी, जो केवल साहित्य प्रकाशित न करे, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक सोच का प्रकाश भी पहुंचाए।
उनका मानना था कि यदि हमारा ध्यान केवल बीमारी और पीड़ा पर केंद्रित रहेगा, तो जीवन की संभावनाएँ सीमित हो जाएंगी। इसके विपरीत, यदि हम अपनी ऊर्जा समाज में आशा, प्रेरणा और सकारात्मक चिंतन का प्रसार करने में लगाएँ, तो न केवल हमारा अपना जीवन अर्थपूर्ण बनेगा, बल्कि हम दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकेंगे।
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह देखकर संतोष और खुशी होती है कि वह सपना धीरे-धीरे वास्तविकता का रूप ले रहा है। अनेक प्रतिष्ठित और नवोदित लेखक इस मिशन को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। हम अपने सभी लेखकों, पाठकों, शुभचिंतकों और सहयोगियों के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं, जिनके विश्वास और स्नेह ने इस यात्रा को संभव बनाया।
क्रमश:
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