“मौसम नहीं, समाज का आईना भी है गरमी!”
यशवन्त कोठारी ,जयपुर
…गरमी के दिन ,बिजली गुल होने के दिन परेशानी के दिन । तेज गरमी ,लू की चपेट में बड़े बूढे़ उूपर की राह पकड़ लेते है। जवानों को उल्टी ,दस्त ,मच्छर ,मक्खी परेशान करते हैं।
बीमारियों की शुरुआत है उमस वाली गरमी । आंखों की बीमारियॉं है गरमी के दिन । मंहगाई की मार से गरमी भी त्रस्त हो जाती है मगर गरमी में कुछ सुकून भी है । अमलतास गुलमोहर के फूल दिल ,दिमाग ,आंख और मौसम को सुकून देते हैं ।
गरमी के दिन ही है जो हमारे को फलों के राजा आम तक पहुॅचाते है । आम तेरे कितने नाम । आम का जिक्र आते ही गालिब की याद सताने लगती हे।
आम से ध्यान हटे तो फालसे ,तरबूज ,खरबूज ,लीची ,जामुन ,शहतुत और ककडी़ पर नजर जा टिकती है। लैला की पसलियों की तरह खुबसूरत ककडी़ मीठा लाल तरबूज ,सेकरीन सा खरबूजा और खट्टा-मीठा फालसा । गरमी में खूब सुकून देते हैं।
भांग ,ठण्डा़ई खसखस के दाने काली मिर्च और बगीची में सिलबट्टा गरमी को कृतार्थ करते हैं। गुलाब खसखस केवड़ा ,कैरी के शरबतों का क्या कहना । गरमी पास भी नहीं फटकती । गरमी के दिनों में ही तो गोल गप्पे,पानी पूरी ,आईसक्रीम , केण्ड़ी ,बर्फ का गोला आदि चीजों की याद आती है। वाह गरमी के दिन । बिना कुल्फी के कैसे गुजारे गरमी के दिन ।गरमी की छुट्टियॉ है नाना ,दादा के जाना है। गरमी गांव में गुजारनी है। दादी ,नानी के किस्से कहाानियां सुनते सुनते गरमी कब बीत जाती पता ही नहीं चलता। लेकिन अब गरमी में मल्टीप्लेक्स ,शॉपिंग मॉल , और बड़े चौराहे है।
गरमी के दिन । सुबह जल्दी होती है। शाम देर से होती है। पन्द्रह घंटों का दिन । सूरज के ओवर टाइमके दिन । उसके रथ से आग बरसने के दिन ।
अम्मा कच्ची कैरी का पना बना कर सबको पिला रही है। बाहर मत निकलना । निकलो तो खूब पानी पीकर जाना । हाथ-पांव ,सिर ,आंख बचाकर रखना । ये गरमी के दिन । लाटसाहबों के पहाड़ पर राजधानी बनाने के दिन ।राष्ट्रपति शिमला । राज्यपाल माउन्टआबू । सब के लिए गरमी के दिन । सौगातों के दिन । आलस के दिन धूप का चश्मा लगाकर गरमी में जुगााली के दिन
गरमी के दिन । पैसे वालों के दिन । कुल मिलाकर गरमी के दिनों की याद मुझे बारिश तक रहती है। आम खाने का कोई दूसरा मौसम हो तो आप मुझे बताये वैसे गरमी फलों का रस भी है और ,गन्ने का चूसा हुआ छिलका भी । गरमी में पंखे कूलर भी और गुलाब की पंखुड़ियां भी ।
गरमी सताती भी है और ठण्ड़ाती भी है । आपाढ़ का पहला दिन ,पहला बादल ,मेघदूत सब का कारण हे गरमी के दिन । गरमी से प्यार करने लगा हूॅ मैं । गरमी के दिनों में शादी , ब्याह के दिन । हनीमून के दिन । पहाड़ों पर घूमने के दिन । सांय काल पार्क में प्यार से पार्टनर को निहारने के दिन । गरमी के क्या कहने। आह गरमी ! वाह गरमी ! हाय गरमी!!
(काल्पनिक रचना)
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