लेखक : उत्तम कुमार तिवारी ” उत्तम “ (लखनऊ)
त्याग और प्रेम से जुड़ा अनूठा बंटवारा।
सारांश :
“अनूठा बंटवारा” गुरुदीन नामक उस त्यागी पिता की कहानी है जिसने गरीबी के बावजूद परिवार को हंसी-खुशी पाला। बेटों में बंटवारे का विवाद होने पर उसने बुद्धिमानी से फैसला कर परिवार की एकता बनाए रखी। कहानी ग्रामीण जीवन, संयुक्त परिवार और भावनात्मक बंधन को दर्शाती है।
आइए संयुक्त परिवार के त्याग, प्रेम और ग्रामीण जीवन की सादगी झलकाती इस कहानी का आनंद लीजिए –
धीरे धीरे गुरुदीन को अपनी बहन की शादी की चिंता होने लगी |
रोज रात मे अम्मा गुरुदीन को कहने लगी की बिटिया के लिए लडका देखो और जल्दी से शादी कर दो ताकि हम भी अपनी बिटिया के हाथ पीले होते हुये देख ले | कुछ दिनो के बाद गुरुदीन ने अपने गाँव से थोड़ी दूर पर अपनी बहन का विवाह तय कर दिया
अब चिंता थी कि विवाह के लिए पैसे कहा से लाये जाये तो वह अपने गाँव के ठाकुर साहब से मदद मागी और उनसे कहा कि ठाकुर साहब हम आप के पैसे धीरे धीरे चुका देंगे | ठाकुर साहब ने उनकी शराफत की वजह से उनकी मदद कर दी और गुरुदीन ने अपनी बहन का विवाह कर दिया |
इसी तरह से गुरुदीन ने अपनी सभी बहनो और बेटियो का भी विवाह कर दिया | अब बेटो के विवाह का नम्बर आया तो गुरुदीन ने अपने सभी बेटो का भी विवाह कर दिया | पूरा परिवार हसी खुशी के साथ रहने लगा |
अब गुरुदीन और उनकी पत्नी दोनो बूढ़े हो गये थे | गुरुदीन और उनकी पत्नी कोई काम नही करते थे घर पर ही रहते थे | कुछ समय बाद बहुओ मे धीरे धीरे आपसी तकरार होने लगी ये तकरार लड़को मे बढ गई अब बात यहाँ तक आ गई कि बंटवारा कर लिया जाये |
जब ये बात गुरुदीन के पास पहुंची तो वो मन ही मन बहुत दुखी हुआ | लेकिन ये बात पूरे गाँव मे फैल गई |
अब पंचायत बैठ गई बंटवारा करने के लिए सभी ने अपना अपना मत प्रकट किया | उसके बाद बात आई कि गुरूदीन और गुलाबो किसके पास रहेंगी तो सभी ने कहा कि एक एक महीने गुरुदीन एक लडके के पास रहेंगे और गुलाबो दूसरे लडके के पास रहेंगी |
ये सब सुन कर गुरुदीन बहुत दुखी हुआ और फिर उसने सब से कहा कि पूरी ज़िन्दगी हम इतने बडे परिवार को लेकर साथ साथ रहे हैं और अब बुढ़ापे मे हम दोनो अलग अलग रहेंगे ऐसा नही हो सकता हैं | तो सभी पंचो ने गुरुदीन से पूछा कि फिर कैसे हो बंटवारा ?
गुरुदीन ने अपना फैसला सुना दिया कि हम अपने सभी बेटो को अलग अलग करते हैं और सभी बेटे मेरे पास चार चार महीने रहेंगे और सब बेटे मेरी बहनो और बेटियो को अपने अपने पास तीज त्योहारो मे बारी बारी से बुलायेंगे | फिर मेरे दोनो लोगो के न रहने के बाद जो भी मेरी सम्पत्ति हैं उसको बराबर बराबर बांट लेंगे |
यह फैसला सुन कर सभी पंचो ने ताली बजा कर स्वागत किया | और सभी बेटो ने इस फैसले का स्वागत करके गुरुदीन के पैरो मे गिर गये और रोने लगे |
इस तरह गुरुदीन का बंटवारा पूरे गाँव मे लागू हो गया |
(काल्पनिक कहानी)