“जहाँ दया और प्रेम का बसेरा होता है, वहाँ गौरैया ही नहीं, खुशियाँ भी चहचहाती हैं।”
सुनीता मिश्रा, द्वारिका- दिल्ली
गांव के आंगन में एक दिन एक नन्ही गोरैया घायल होकर गिर गई। घर का शरारती बच्चा उसको उठाकर बाहर फेंकने जा रहा था। तभी गांव के एक बुजुर्ग ने कहा- अरे गौरैया का आना और रहना बहुत शुभ होता है इसको फेंको मत, इसको पानी और दाना दो भला होगा!
पास में खड़ी उस बच्चे की बड़ी बहन पाखी ने इस बात को सुनकर गौरैया को अपने दुपट्टे में धीरे से रखा और उसकी देखभाल करने लगी। पानी पिलाया, दाने डाले। धीरे-धीरे वह गौरैया अच्छी भी हो गई और अपने साथ अब ढेर सारी गोरैया को लेकर आने लगी।
अब पाखी के प्रतिदिन के दिनचर्या में गौरव के लिए पानी रखना, दाना डालना, उनके बर्तन को साफ करना, उनके जगह को साफ करना शामिल हो गया। कुछ बातें कहावत होती है किंतु साफ दिल और सच्चे मन से किया गया हर काम फलदाई होता है।
घर के सारे रोशनदानों मैं अब गौरैया चहकते रहती थी, मानो घर में संगीत की धुन बज रही हो। बरसों ऐसे ही होते रहा।
किंतु यह कार्य भी आसान नहीं था पाखी को प्रतिदिन दादी और अपनी मां का विरोध सहना पड़ता था। वह नहीं चाहती थी कि गौरैया घर में बसेरा रखें। इसका कारण था घर आंगन का गंदा हो जाना। किंतु पाखी ने किसी का नहीं सुना,
वह घर आंगन की सफाई करती थी, साथ में गौरैयां का भी ध्यान रखा करती थी।
यह कार्य निस्वार्थ भाव से किया जा रहा था। अब पाखी बड़ी हो गई थी किंतु पाखी के पि तयता नहीं थें । पाखी की शादी की चिंता “माॅं , को लगी रहती थी। पाखी मजबूरी वश पढ़ाई भी ज्यादा नहीं कर पाई थी।
किंतु कहते हैं ना दुनिया के हर अच्छे कार्य का फल सुखदाई होता है। चलते चलते एक दिन एक रिश्तेदार ने एक रिश्ता बताया।
यह रिश्ता किसी भी हाल में होना संभव नहीं था क्योंकि लड़का एक उच्च अधिकारी था। परिवार आर्थिक दृष्टि से भी बहुत समृद्ध था। सबको यह रिश्ता एक व्यंग्य और मजाक लगा था, जो कहीं से भी संभव नहीं था।
किंतु ईश्वर अच्छे कर्मों से ऋणी हो जाते हैं और वह किसी का ऋण अपने सर पर नहीं रखते हैं। इंसान का किया हुआ हर अच्छा कार्य ईश्वर के ऊपर ऋण होता है। और ईश्वर इसे ब्याज के साथ वापिस करते हैं।
इसके साथ ही पाखी के सर पर गौरैया का आशीर्वाद भी बना हुआ था।
डरते डरते लड़के के द्वार पर पाखी के चाचा रिश्ता लेकर गए । लड़के वालों ने पहली बार में ही लड़की देखने की बात रख दिया, क्योंकि उन्हें अच्छी लड़की चाहिए थी।
दूसरी बात लड़के की लंबाई अत्यधिक थी इसलिए लड़की भी लंबी हो इसकी डिमांड थी। लड़की वाले ने पाखी को देखा और पहली नजर में ही पसंद कर लिया।
पाखी कम पढ़ी-लिखी किंतु एक खूबसूरत समझदार और अच्छी सोच रखने वाली विनम्र लड़की थी।
“पाखी की शादी बहुत ही आसानी से बिना किसी झोल-झमेले के तय हो गई।”
इस बात पर विश्वास करना मुश्किल था किंतु पाखी के नेक कार्यों का फल उसके सामने था। पाखी की शादी धूमधाम से हो गई। इस शादी में कोई छल नहीं था।
अअएक उच्च सोच रखने वाले सौम्य और रहम दिल जीवनसाथी पाखी को जीव पर दया दिखाने के बदले में ईश्वर ने दिया है।
पाखी जब दोबारा मायके आई तो एक भी गौरैया नहीं थी।
क्योंकि उस घर में सच्चे और अच्छे दिल की पाखी ससुराल चली गई थी और गौरैया एक पवित्र पंछी होती है, जो इंसान के हृदय को पढ़ लेती है। उसके हृदय की दया और प्रेम को समझती है।
हमारे ऋषि महर्षि और पूर्वजों ने गौरैया को बचाने के लिए ही उसके आने को शुभ बताया था। प्रदूषण, गाड़ियों की तीव्र आवाजें, ऊंची-ऊंची इमारतें, अशांत शहर गोरैया को
इंसानों की बस्ती से दूर कर दिया।
गौरैया को छोटे-छोटे पेड़ चाहिए, शांत वातावरण चाहिए और सुरक्षित स्थान चाहिए, जो आज का मानव नहीं दे पा रहा है। हमारी गौरैया हम इंसानों से रूठी हुई है। अपनी संख्या कम होने के कारण और इंसानों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी होने के कारण।
इसमें लिखी गई पाखी की कहानी सच्ची है।
(सत्य घटनाओं पर आधारित)
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