“भूपेन हजारिका: स्वर जो समय से परे, उम्मीद और मानवता का गीत बन गए।”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
सारांश::
भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी केवल एक गायक का स्मरण नहीं, बल्कि उस सकारात्मक दृष्टि का उत्सव है जिसने संगीत को समाज की धड़कन बना दिया। उनकी रचनाएँ जीवन, संघर्ष और आशा को जोड़ती हैं और हर पीढ़ी को प्रेरित करती हैं। आज भी उनके गीत हमें सिखाते हैं कि संगीत मनुष्यों के बीच की दूरी मिटाकर भविष्य को रोशन कर सकता है।आइए विस्तार से जानें भारत की इस महान विभूति के बारे में—
भारत की सांस्कृतिक धरोहर में कुछ ऐसे स्वर हैं जो समय की धूल को पार कर आज भी ताजगी और उम्मीद का संदेश देते हैं। भूपेन हजारिका (8 सितंबर 1926 – 5 नवंबर 2011) का नाम उनमें सबसे ऊपर आता है। इस वर्ष पूरा देश उनके जन्म के सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। यह केवल किसी महान गायक, संगीतकार या कवि का स्मरण नहीं है, बल्कि उस सकारात्मक दृष्टि का सम्मान है, जिसने संगीत को समाज की धड़कन बना दिया।
भूपेन हजारिका असम की धरती पर जन्मे, लेकिन उनका स्वर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उनकी आवाज़ में लोक की मिठास थी और दृष्टि में विश्व बंधुत्व का भाव। वे मानते थे कि गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जीवन को बदलने की शक्ति रखते हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में हर बार आशा, संघर्ष और एक बेहतर कल की छवि दिखाई देती है।
उनके लोकप्रिय गीतों में प्रकृति, इंसान और मानवता का अद्भुत मेल दिखता है। वे यह कहते रहे कि नदियाँ केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवन की निरंतरता और एकता का प्रतीक हैं। उनकी रचनाओं में जब ब्रह्मपुत्र की गूंज सुनाई देती है तो लगता है जैसे पूरी मानवता को जोड़ने वाली डोर बह रही हो।
भूपेन हजारिका का जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक था जितना उनका संगीत। अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद वे जब भारत लौटे, तो उन्होंने सहजता से पश्चिमी ज्ञान और भारतीय संवेदनाओं को मिलाया। वे मानते थे कि कला का असली उद्देश्य समाज की भलाई है। चाहे फिल्मी गीत हों या लोकधुनों पर आधारित रचनाएँ, उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है—दूसरे मनुष्यों के साथ खड़ा होना।
उनके गीत आज भी सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत हैं। संघर्षरत युवाओं के लिए उनमें प्रेरणा है, बुज़ुर्गों के लिए स्मृति और बच्चों के लिए उत्साह। भूपेन हजारिका ने हमें सिखाया कि जीवन की कठिनाइयों को गीतों में ढालकर भी जीत हासिल की जा सकती है।
👉 उनके गीतों में गूंजती यह पंक्तियाँ आज भी हौसला देती हैं—
- “मनुष्य मनुष्य के लिए, जीना सीख ले इंसान।”
- “जहाँ दुख है वहाँ गीत है, और जहाँ गीत है वहाँ उम्मीद है।”
- “नदी की तरह बहो, और हर तट को जीवन दो।”
समारोहों की झलक
जन्मशताब्दी समारोह को देशभर में बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। दिल्ली के भारत भवन और विज्ञान भवन में विशेष सांस्कृतिक संध्याएँ आयोजित हो रही हैं, जहाँ देश के प्रख्यात गायक और नर्तकियाँ उनके अमर गीतों को नए रंग में प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं गुवाहाटी और तेजपुर में हजारों लोग एकत्र होकर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर सामूहिक गान कर रहे हैं। असम के गाँव-गाँव में लोकनृत्य और सांस्कृतिक झांकियाँ सजाई जा रही हैं। विश्वविद्यालयों में उनके जीवन और विचारों पर संगोष्ठियाँ हो रही हैं, जहाँ युवा पीढ़ी यह जान रही है कि संगीत केवल सुर-ताल नहीं बल्कि समाज को दिशा देने की ताक़त भी है।
आज जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है—असमानता, तनाव, और विभाजन—भूपेन हजारिका के गीत हमें याद दिलाते हैं कि संगीत की शक्ति सबसे बड़ी है। यह मन को जोड़ता है, दूरी मिटाता है और भविष्य को रोशन करता है।
भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी सिर्फ एक कलाकार का सम्मान नहीं है, यह एक संदेश है—जीवन को गीतों की तरह खुलकर जियो, मुश्किलों के बीच भी उम्मीद बनाए रखो, और हर पल को सकारात्मकता से भर दो।