“हर ठोकर के बाद एक नई राह मिलती है, बस कोशिश कभी मत छोड़िए।”
विजय कुमार तैलंग जयपुर, राजस्थान
कंपनी में जाने पर पता चला कि वहाँ चपरासी के लिए साक्षात्कार कल होगा। आज तो वहाँ लेखा सहायक (एकाउंट असिस्टेंट) का इंटरव्यू हो रहा है। मैं इस जॉब के लिए योग्य था इसलिए मैंने भी कंपनी के ऑफिस से एक पेपर लेकर अपना प्रार्थनापत्र एवं बायो डाटा लिखकर वहाँ एक लिपिक को दे दिया यह जानते हुए भी कि मेरे पास कोई सिफारिश नहीं है पर मैं अंधेरे में तीर छोड़ना चाहता था, शायद निशाने पर लग जाए। लिपिक ने मेरा प्रार्थना पत्र व बायो डाटा अंदर साहेब (मालिक) की टेबल पर पहुंचा दिया। उसने पूछा – “प्रमाण पत्र तो लाये हो न?”
“हाँ। “
“ठीक ग्यारह बजे साक्षात्कार चालू होंगे, उस समय आना। “
इस समय ठीक पौने दस बजा था तो मैं कंपनी के बाहर एक चाय की थड़ी पर जाकर बैठ गया। मैंने एक चाय का ऑर्डर दे दिया। मेरा जी धक धक कर रहा था ये सोचकर कि कहीं साक्षात्कार में सिफारिश की बात न पूछ लें।
चाय मेरे सामने आ गई। मैंने थड़ी के मालिक से पूछा – “इस कंपनी के मालिक के बारे में कुछ जानते हो?”
थड़ी वाला मुस्कुरा कर बोला – “राय साब हैं इसके मालिक! क्यों, क्या इंटरव्यू देने आये हो? “
“राय साब” नाम सुनकर अचानक मेरी चेतना जाग गई। श्री नरोत्तम रॉय मेरे विषय के लेक्चरर थे। कहीं उनसे इन “राय साब” का कोई लिंक तो नहीं!
“हाँ, इंटरव्यू देने आया हूँ। ” मैंने थड़ी वाले से कहा और चाय पीने लगा।
इंटरव्यू के दौरान ये पहला मौका था जब कथित मालिक “राय साब” के मैनेजर ने मुझसे सिफारिश की कोई बात न करके मेरे प्रमाण पत्र देखे। उसने मेरे बायो डाटा पर कुछ रिमार्क किया और बाहर बैठने को कहा।
मेरे बाद कुछ उम्मीदवार और आये और इंटरव्यू देकर चलते बने। मैंने आखिरी उम्मीदवार से इंटरव्यू के बाद पूछा – “क्या हुआ? आप जा क्यों रहे हो? “
“कहा है फोन करके बुलाएँगे। ” कहकर वह तेजी से निकल गया।
मगर मुझे तो ऐसा नहीं कहा। मुझे तो बैठा लिया गया। मैं सोचने लगा। मेरा दिल धड़क रहा था।
लंच टाइम के बाद मुझे बॉस के चैंबर में बुलाया गया।
एक सुटेड बूटेड लगभग पचपन वर्ष का एक प्रभावी व्यक्ति मेरा बायो डाटा देख रहा था। उसके पास दो प्रार्थना पत्र पड़े थे।
“मे आई….! “
“कम इन एंड सिट डाउन! ” मेरे इजाजत मांगने से पहले ही उस व्यक्ति की गम्भीर आवाज उभरी।
मैं चुपचाप टेबल के सामने की सीट पर बैठ गया।
“हैरानी है कि आपने इस कम्पनी में दो जॉब्स के लिए एफलीकेशन दी है? ”
“जी, वो मुझे पहले चपरासी के जॉब का पता चला था आपके विज्ञापन से इसलिए मैंने उस जॉब के लिए प्रार्थना पत्र बाई पोस्ट भेज दिया था लेकिन जब मैं यहाँ आया तो पता चला कि उसका साक्षात्कार आज नहीं कल होगा और मुझे ये भी पता चला कि आज आपके कार्यालय में लेखा सहायक के लिए साक्षात्कार होना है। चूंकि यह जॉब मेरी एजुकेशन के लिहाज से फिट था अत: मैंने आज इसके लिए एफलीकेशन दे दी।”
“जब आप एकाउंट असिस्टेंट के जॉब के लिए अपने को योग्य मानते हो तो आपने चपरासी के जॉब के लिए एफलीकेशन क्यों लगाई? “
“सा’ब! आप तो जानते होंगे कि देश में बेरोजगारी कितनी है। मैं अपनी योग्यता के अनुसार जॉब ढूंढते ढूंढते जब थक गया तो मैंने किसी भी जॉब को करने का मन बनाया और इसीलिए मैंने चपरासी के जॉब के लिए एफलाई कर दिया था! “
“हूँ, आपको कहीं और काम का तजुर्बा नहीं है और आपकी जानकारी भी यहाँ….! “
“जी, मेरे कॉलेज के लैक्चरर श्री नरोत्तम रॉय मुझे जानते हैं। ” मैं बीच में ही बॉस की बात काटते हुए बोल पड़ा।
बॉस जो रॉय सा’ब थे मुझे घूरते हुए बोले –
“उनका नंबर दो! “
मैंने कॉलेज का लैंडलाइन नंबर दे दिया। उन्होंने मुझे बाहर जाकर बैठने के संकेत किया और उठ खड़े हुए।
कंपनी के लंच ब्रेक के बाद मुझे फिर बॉस के चैंबर में बुलाया गया। मुझे सामने बॉस की सीट पर बैठे एक प्रौढ़ व्यक्ति को देखकर आश्चर्य हुआ।
अरे, ये तो श्री नारोत्तम रॉय, मेरे लेक्चरर ही हैं। मैं हत्प्रभ रह गया।
“सर, आप यहाँ? “
“हाँ, मैं! रिटायर होने के बाद मैं अपने बड़े भाई सा’ब की कंपनी में हाथ बटा रहा हूँ। तुम्हारी एकाउंट असिस्टेंट की जॉब मंजूर हो गई है। कल से आ जाओ। “
मैं अभिवादन करते हुए वहाँ से चला आया।
•••
“जरा इनपर पोलिश कर दो! ” मैंने मार्केट के कोने में बैठे उसी मोची के सामने अपने नये जूते रख दिये।
मोची मुस्कुराते हुए बोला – “बाबूजी, कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती! “
(काल्पनिक रचना)
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