“समय का सम्मान, रिश्तों का सम्मान है!”
प्र्स्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
दीप्ति बेहद खुश थी। आज उसके लिए एक खास दिन था। उसने तय किया था कि वह अपने ऑफिस के दोस्तों, पुराने कॉलेज ग्रुप और कुछ रिश्तेदारों के लिए एक छोटी सी “थैंक यू पार्टी” देगी। यह पार्टी उसके प्रमोशन और नई नौकरी की सफलता का जश्न थी। उसने शहर के एक तीन सितारा होटल “सनराइज पर्ल” को बुक किया था।
होटल की बुकिंग दोपहर तीन बजे से छह बजे तक की थी। उसने पूरी मेहनत से तैयारियां की थीं — मेन्यू में पनीर टिक्का, पास्ता, चिली पोटैटो, गुलाब जामुन और स्पेशल मोका कॉफी शामिल थी। सजावट में उसने नीले और सफेद फूलों का थीम चुना था।
माँ ने जब खर्चे का हिसाब सुना तो कहा, “बेटा, तीन घंटे की पार्टी के लिए इतना पैसा? घर पर भी रख सकती थी।”
दीप्ति मुस्कुराई, “माँ, यह मेरा छोटा सा ड्रीम इवेंट है। मैं चाहती हूँ कि सबको अच्छा लगे और सब वक्त पर आएं। यह दिन यादगार बने।”
दोपहर के दो बज चुके थे। होटल में सारी तैयारियाँ पूरी थीं। दीप्ति नीली साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी। उसने अपने बाल हल्के से बाँध रखे थे और आँखों में उत्साह की चमक थी। हॉल में हल्का संगीत चल रहा था।
उसने फोन पर अपने ग्रुप में मैसेज किया, “Guys, party starts at 3 pm sharp. Don’t be late please ❤️”
वेटर ने आकर पूछा, “मैम, गेस्ट आने वाले हैं क्या?”
दीप्ति ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “हाँ, सब रास्ते में होंगे। इंडियन टाइमिंग, you know!”
उसने मज़ाक में कहा, लेकिन उसके दिल में एक हल्की चिंता उठी।
तीन बज गए। दीप्ति बार-बार दरवाजे की ओर देखती रही। हर बार उसे उम्मीद होती कि अब कोई आएगा, लेकिन हर बार दरवाजा खाली मिलता।
उसने फिर ग्रुप में लिखा, “Where are you guys? Everything’s ready! Please come soon 🙏”
थोड़ी देर में एक दोस्त ने रिप्लाई किया, “बस निकल रहे हैं, यार। पंद्रह मिनट में पहुँचते हैं।”
दूसरे ने लिखा, “थोड़ा ट्रैफिक है दीप्ति, तू शुरू कर ले।”
पर कोई आया नहीं।
साढ़े तीन बज चुके थे। स्नैक्स ठंडे हो चुके थे। दीप्ति का चेहरा उतरने लगा। वह कुर्सी पर बैठी थी, नजरें दरवाजे पर जमी थीं।
चार बजे, उसने गहरी सांस ली। हाथ काँप रहे थे। दिल तेजी से धड़क रहा था।
वेटर ने पास आकर कहा, “मैम, खाना लगवा दें?”
क्रमश: