मनुष्यता, कल्पना और लोक–संवेदना के अद्वितीय रचनाकार
दिविक रमेश, नोएडा
कल्पना, लोक और संवेदना का अद्भुत संसार
विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उसमें लोक, कल्पना और संवेदना एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं। वे केवल कहानी नहीं कहते, बल्कि एक ऐसा संसार रचते हैं जिसमें पाठक धीरे-धीरे प्रवेश करता है और फिर उससे बाहर निकलना नहीं चाहता।
‘हरी घास की छप्पर वाली झोंपड़ी और बौना पहाड़’ इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें बौना पहाड़ केवल पहाड़ नहीं, बल्कि बच्चों की कल्पनाओं का साथी है। झोंपड़ी केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि रहस्य और आकर्षण का केंद्र है। यहाँ प्रकृति भी जीवित है और वस्तुएँ भी।
उपन्यास का स्कूल भी अत्यंत रोचक है। दीवारों में बने आले बच्चों के बैठने की जगह बन जाते हैं। बोलू का सबसे ऊपर वाले आले में बैठना केवल शरारत नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्रता की इच्छा का प्रतीक लगता है। लेखक साधारण घटनाओं को भी अद्भुत बना देते हैं।
उपन्यास में पक्षियों और जीव-जंतुओं का चित्रण भी अत्यंत प्रभावशाली है। बाज, बुलबुल, मधुमक्खी, खंजन चिड़िया— सबके माध्यम से प्रकृति का जीवंत संसार निर्मित होता है। बच्चों और प्रकृति का यह संबंध आधुनिक जीवन में दुर्लभ होता जा रहा है।
यदि इस उपन्यास को आदिवासी दृष्टि से पढ़ा जाए, तो स्पष्ट होता है कि यहाँ मनुष्य और प्रकृति अलग-अलग नहीं हैं। जंगल, बस्ती, पक्षी, मंदिर और बच्चे— सब एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा हैं। यह दृष्टि आधुनिक उपभोक्तावादी सोच के विपरीत है।
विनोद कुमार शुक्ल की भाषा भी अद्वितीय है। उनकी शैली इतनी निजी है कि उसे “शुक्लिया भाषा” कहा जा सकता है। वे सामान्य शब्दों में भी नया अर्थ भर देते हैं। उनकी भाषा में छत्तीसगढ़ी स्थानीयता का स्वाद है, लेकिन वह किसी सीमित क्षेत्र की भाषा नहीं बनती। उसमें सार्वभौमिक मानवीयता मौजूद रहती है।
उनकी रचनाओं में मासूमियत और गहराई साथ-साथ चलती हैं। वे बच्चों की तरह आश्चर्य करते हैं, लेकिन दार्शनिक की तरह सोचते हैं। यही कारण है कि उनका साहित्य एक साथ सरल भी लगता है और जटिल भी।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब उनका साहित्य और अधिक महत्त्वपूर्ण हो उठता है। वे हमें याद दिलाते हैं कि साहित्य का सबसे बड़ा उद्देश्य मनुष्यता को बचाए रखना है। उनकी रचनाएँ हमें संवेदनशील बनाती हैं, कल्पनाशील बनाती हैं और यह सिखाती हैं कि साधारण जीवन में भी असाधारण सौंदर्य छिपा होता है।
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