लेखिका: शिखा तैलंग (भोपाल )
शेयर बाजार एक सागर है — मोती वही पाता है जो डूबना जानता है!
सारांश :
यह कहानी है 61 वर्षीय हर्षद की, जो रिटायरमेंट के बाद शेयर मार्केट की डेली ट्रेडिंग में हाथ आजमाते हैं और एक दिन अचानक हार्ट अटैक जैसी स्थिति में अस्पताल पहुंच जाते हैं। परिवार की मदद और पुराने दोस्त चतुर्वेदी की समझाइश से उन्हें सही निवेश, रिस्क मैनेजमेंट और शेयर बाजार की गहराई से स्टडी का महत्व समझ में आता है। (डेली ट्रेडिंग, शेयर मार्केट, हार्ट अटैक, परिवार, समझदारी, चतुर्वेदी अंकल, निवेश रणनीति) आखिर में वह सीखते हैं कि गहराई से खोज कर ही शेयर बाजार रूपी सागर से ‘मोतियों’ की तलाश की जा सकती है।
आइये इस शेयर मार्केट पर आधारित इस दिलचस्प निवेश की कहानी का आनंद लीजिये –
चैप्टर—3
हर्षद— मैं शेयर मार्कट के काम से वैसे तो हर दिन 10—15 हजार रुपये कमा लेता हूं। पर अब जाने क्या हुआ? एकदम से अपने सब शेयरों की कीमत लुढ़कने लगी।
पापा! प्लीज छोड़ो ये सब बातें। शेयर मार्केट के बारे में बाद में बात कर लेंगे, पहले आप ठीक तो हो जाओ। सोनम पापा के सिर पर हाथ फेरती हुई बोली।
मेरे प्यारे बच्चे! यह कहकर हर्षद ने कुछ देर के लिए आराम करने की सोचकर आंखें बंद कर लीं। जब सुनंदा को यकीन हो गया कि हर्षद को आराम हो गया है तो उन्होंने अस्पताल के सामने के जैन भोजनालय से सबके लिए खाना मंगा लिया। इस बीच, डॉक्टर और नर्सें चक्कर काट—काटकर हर्षद की तबियत का जायजा लेते रहे और उनका पूरा ध्यान रखते रहे।
करीब 48 घंटे अस्पताल में बिताने के बाद हर्षद की तबीयत नार्मल होने के करीब होने को आ गई। डॉक्टरों ने उनकी सेहत को स्थिर मानते हुए घर ले जाने की सलाह दी।
हर्षद ने दो एक दिन आराम किया पर उसके बाद सुबह होते ही बैचेनी शुरू हो जाती। शेयर मार्केट में डेली ट्रेडिंग के लिए उनके हाथ मचलने लगते। उनकी ये सब हरकतें सुनंदा को बड़ी नागवार गुजरतीं और गाहे—बगाहे उन्हें टोक—टाक कर डेली ट्रेडिंग करने से मना कर देतीं। हर्षद मन मसोसकर रह जाते। ऐसे ही तीन दिन बीत गए। इसके बाद शनिवार और रविवार पड़ गए तो शेयर मार्केट बंद रहने से हर्षद डेली ट्रेडिंग नहीं कर सके।
सोमवार को नहा—धोकर हर्षद जैसे ही कंप्यूटर पर बैठकर डेली ट्रेडिंग शुरू करने वाले थे कि तभी काल बेल बज उठी। गिरधर ने दरवाजा खोला और बोला — अरे! चतुर्वेदी अंकल आप? आइए न मैं अभी पापा को बुलाता हूं।
ड्राइंग रूम में जब नागेश चतुर्वेदी अंकल बैठ गए तो हर्षद उनके पास आए। उन्होंने पूछा — और क्या हाल हैं, भई? कैसे आना हुआ?
पाठकों को बता दें कि नागेश चतुर्वेदी अहमदाबाद के बहुत बड़े सीए हैं। वे हर्षद के बचपन से दोस्त रहे हैं। जब उन्हें हर्षद की तबियत के बारे में खबर लगी तो वे अपने हर्षद से मिलने के लिए अपना आफिस छोड़कर उनके घर सुबह—सुबह ही आ गए थे।
चतुर्वेदी— वो कल रात गिरधर का फोन आया था। उसने आपकी तबियत के बारे में बताया था। उसने यह भी बताया था कि शेयर मार्केट में डेली ट्रेडिंग करने के दौरान आपकी तबियत बिगड़ने से अस्पताल ले जाना पड़ा था। अरे! साहब! डेली ट्रेडिंग करने से पहले मुझसे तो पूछ लिया होता। आप तो जानते ही हैं कि मैं पिछले छह सालों से यह काम कर रहा हूं।
हर्षद — यार! वो कुछ लोगों ने कहा था कि डेली ट्रेडिंग में अच्छा पैसा बनता है। इसलिए मैंने रिटायरमेंट के बाद फौरन अपना डी—मेट एकाउंट खुलवा कर यह काम चालू कर दिया था।
चतुर्वेदी — ठीक है। कोई बात नहीं। देखो हर्षद, डेली ट्रेडिंग एक हाई रिस्क गेम की तरह है। इसके कुछ रूल्स, रेगुलेशन्स हैं। यह काम शुरू करने से पहले नेट पर डेली ट्रेडिंग से जुड़े वीडियो देखना और कुछ नामी—गिरामी लेखकों की पुस्तकें पढ़ लेना ठीक रहता है।
हर्षद — मैंने तो ऐसा नहीं किया।
चतुर्वेदी — इसीलिए आपको दिक्कत हो गई। अगर आप अच्छी स्टडी करके शेयर मार्केट में हाथ डालोगे तो नतीजा और अच्छा होगा। एक बात यह मैं जानना चाहता हूं कि आप रोज डेली ट्रेडिंग शुरू करने से पहले खबरें वगैरह देखते हो या नहीं?
क्रमश:
(काल्पनिक कहानी )