नीलिमा तैलंग, पन्ना (मध्य प्रदेश)
अब धीरे धीरे दोनों आपस में फोन पर देर तक बातें करने लगे । दोनों में एक दूसरे के परिवार ,मित्रों ,साहित्य और राजनीति जैसे सभी विषयों पर देर रात तक बातें होने लगी ।फोन पर कमल कुमार ने कविता को बताया कि वे विवाहित थे और दो बच्चों के पिता थे । कविता ने भी उनको अपने विधवा होने और एक बेटे की मां होने की बात बताई ।
इस प्रकार उनकी ये फ्रेंडशिप दो साल तक निर्विघ्न चलती रही ।लेकिन अब कविता को लग रहा था कि वो कमल कुमार की तरफ आकर्षित होती जा रही थी ।उसे अपनी इस कमजोरी पर कुछ भय सा लगने लगा था। किंतु उसे कमल कुमार पर पूरा विश्वास था ।कमल कुमार कविता की भावनाओं को अच्छी तरह से समझ रहे थे ।किंतु उन्होंने कविता की भावनाओं का कभी अनुचित फायदा नहीं उठाया ।
धीरे धीरे उनकी इस फ्रेंडशिप को तीन वर्ष से भी अधिक समय बीत गया ।एक बार दोनों को एक साथ ही किसी कार्यक्रम में जाने का अवसर मिला ।जहां दोनों एक दूसरे से आमने सामने मिले ।दोनो ही एक दूसरे से मिल कर बहुत प्रभावित हुए ।कविता इस उम्र में भी बेहद खूबसूरत लगती थी ।कमल कुमार भी कविता की सुंदरता से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके ।कविता तो कमल कुमार की बौद्धिक क्षमता से पहले ही प्रभावित थी।
अब कविता को भी यह अहसास होने लगा था कि कमल कुमार भी उसकी तरह ही उसको पसंद करने लगे हैं । कविता का कोमल मन यह जानते हुए भी कि कमल कुमार समाज के एक जिम्मेदार नागरिक और दो बच्चों के पिता हैं , कमल कुमार के प्रति समर्पित हो चुका था । उसको कमल कुमार से किसी बात की अपेक्षा नहीं थी ।वह तो बस इस बात से ही खुश थी कि कमल कुमार उसको सच्चे दिल से पसंद करते हैं बस ।
अब उन दोनो के बीच देर रात तक फोन पर बातें होती रहती थीं।किंतु कविता एक स्त्री थी और कमल कुमार एक पुरुष । स्री अपने पसंदीदा पुरुष पर पूर्ण समर्पित हो जाती है ।किंतु पुरुष के साथ ऐसा नहीं होता ।शायद ईश्वर ने ही पुरुष को उन कोमल भावनाओं के एहसासों से वंचित रखा है जिन कोमल भावनाओं और एहसासों से स्त्री को लबरेज किया है ।
बीतते समय के साथ कविता जितनी अधिक कमल कुमार से स्वयं को बंधा हुआ महसूस कर रही थी कमल कुमार उतना ही अधिक कविता से दूर जाने की कोशिश कर रहे थे। शायद कमल कुमार की कविता के प्रति सारी उत्सुकता समाप्त हो चुकी थी ।
धीरे धीरे कमल कुमार और कविता के बीच होने वाली बातचीत में समय का अंतराल आने लगा ।कविता इस बात को अच्छी तरह समझ रही थी।लेकिन वह क्या कर सकती थी । गलती उसकी थी ।पुरुषों के स्वभाव के बारे में सब कुछ अच्छी तरह जानते हुए भी कविता कमल कुमार के प्रेम में पड़ी थी ।
कविता के हिस्से में सिर्फ असहनीय दुख, पछतावा और नाकामी आई थी। कविता स्वयं को हाशिया के उस स्थान जैसा महसूस कर रही थी जिसे लेखक अपनी आवश्यकता अनुसार उपयोग करने के बाद खाली छोड़ दिया करते हैं ।
नासमझ कविता समझ नहीं पा रही थी कि आखिर उससे गलती कहां हुई थी??
कविता जैसी स्त्रियां को इस प्रकार के प्रेम प्रसंगों में सदा ही “हाशिए” पर रखा जाता है और शायद रखा जाता रहेगा।
—————————–
अतः मेरी विनती है कविता जैसी उन सभी महिलाओं से कि स्वयं की भावनाओं पर नियंत्रण रखें ।ऐसा कुछ न करें जो आपसे आपकी खुशी छीन कर आपको दुखों के असीम सागर में डूबने को मजबूर कर दे ।
………………………
(काल्पनिक कहानी)
बहुत सुंदर सार है सभी स्त्रियों को ऐसी कहानियों से सीख लेनी चाहिए