रचनाकार : उत्तम कुमार तिवारी ” उत्तम ” , लखनऊ
मेरी निशानी होगी
कयामत मे भी मेरी निशानी होगी
ग़ज़लो मे मेरी एक कहानी होगी ।।
भले ही कोई भुला दे हमे
पत्थरो मे भी मेरी निशानी होगी ।।
खिल उठेगी उस दिन मेरी ग़ज़ल
जिस दिन तेरी मुझमे दीवानगी होगी ।।
सुपुर्दे खाक हो जाऊँगा एक दिन इस दुनियाँ से
मेरी लिखी हुई ग़ज़ल की हर ज़ुबा पर रवानी होगी ।।
ताजोतख्त के लिए नही लिखा ग़ज़ल मैने
मेरी ग़ज़ल मे दुनियाँ के हुकूक की निशानी होगी ।।
ये काफिया ,बंदिश ,अता ,रदीफ़ ,बहर क्या है
मेरे हर लब्ज पर मेरे रूह की निशानी होगी ।।
मेरे अल्फाज़ पढे जाएंगे बड़ी अदा से
जैसे मस्जिद मे सजदा करती हुई पेशानी होगी ।।
कह दो फरिश्तो से आके ले चले मुझे इस ज़हा से
उस ज़हा मे भी मेरी ग़ज़लो की निशानी होगी ।।
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खुदा ने तुमको बनाया होगा
जिस समय खुदा ने तुमको बनाया होगा
जन्नत की बहत्तर हूरो ने तुमको सजाया होगा ।।
डाल कर अमृत की बूँदो को समंदर मे
खुदा ने अपने हाथों से तुमको नहलाया होगा ।।
क्या हुश्न क्या अदाए लेकर आई तुम ज़मी पे
तुम्हारी अदाए देख कर खुदा भी मुस्कुराया होगा ।।
इस ज़मी को जन्नत बनया तुमने अपने पैर रख के
खुदा भी जन्नत को छोड़ कर ज़मी पर उतर आया होगा ।।
करूँ क्या जाके इबादत मस्जिद मे
खुदा भी तेरी इबादत करने आया होगा ।।
ये गीत ये ग़ज़ल ये शेरो शायरी भी तुम पर निछावर
तुम्हे देख कर खुदा ने भी गीत गया होगा ।।
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