सुशीला तिवारी , पश्चिम गांव, रायबरेली
माँ के भवन तक ले चलो
है मेरा नतमस्तक उन्हे उनके चरण तक ले चलो।
आज मुझको साथियों माँ के भवन तक ले चलो।।
मन को अपने कर समर्पण मां के रंग,रंग जाऊंगी,
जलाये ज्योति भक्ति की,उस अगन तक ले चलो ।
चैत्र की है प्रतिप्रदा और शुभ दिवस नवरात्र का,
आगमन माँ का हुआ,,मुझको नमन तक ले चलो ।
पूजन करूँ ,अर्चन करूँ , और करना अरदास है,
आज मुझको साथियों माँ के ,भवन तक ले चलो ।
सज रहा दरबार मां का रौनक ए है खूबसूरत ,
आज मुझको साथियों माँ के ,भवन तक ले चलो ।
मां के भवन में बरसती सुख और समृद्धि है,
आज मुझको साथियों माँ के ,भवन तक ले चलो ।
नयी आशा ,नव किरण दीप जलता है माँ भवन,
आज मुझको साथियों माँ के ,भवन तक ले चलो ।
भीड़ भक्तों की लगी है बज रहे है मृदंग नगाड़े,
आज मुझको साथियों माँ के ,भवन तक ले चलो ।
उम्र भर की ग़लतियों की करना क्षमा -याचना,
करूं चरण की वन्दना उनकी शरण तक ले चलो।
बरसे भवन सुख- शान्ति सौभाग्य दाता मातु दुर्गे,
पावन धुआँ हैअष्टगंध का अब ,हवन तक ले चलो।
रोंक दे आवागमन और मोक्ष दे इस नश्वर देह को,
कौन ऐसा मंत्र है मुझे उस ,भजन तक ले चलो।
यै”सुशीला”अध्यात्म की जागी किरण मन के मंदिर,
मिले चित्त की शान्ति जहाँ ,आचमन तक ले चलो।
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मां की आराधना
सच्चे मन से पुकार प्रेम डोरी से मां को बांधना ,
करो मइया की आराधना सफल होगी साधना ।
धूप,दीप,नैवेद्य चढ़ाकर करो मइया का श्रंगार ,
सिंह वाहिनी, माता दुर्गे करती दुष्टों का संहार ,
खुश हो जायेगी शेरावाली,कोई मांगन मांगना ।
करो मइया की आराधना सफल होगी साधना।।
मां की मूरत मन में बसी है प्रेम सुधा रस धार,
खाली झोली भरती मइया जो भी आता द्वार,
कष्ट हरेंगी मातु भवानी ,रखना मन में भावना ।
करो मइया की आराधना,सफल होगी साधना ।।
आशा पूर्ण सबकी हो जाये कहीं न रहे निराशा,
जो भी सच्चे मन से आये मां पूरी हो अभिलाषा,
भक्तिदान मांग रही “सुशीला”पूर्ण करो कामना ।
करो मइया की आराधना,सफल होगी साधना ।।
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