(संस्कृति, कला और लोकतंत्र की अमूल्य धरोहर)
“स्याही में लिखा गया भारत का आत्मा-ग्रंथ”
प्रस्तुति: शिखा तैलंग, भोपाल
भारतीय संविधान – केवल कानून नहीं, एक सभ्यता की आत्मा
भारतीय संविधान केवल नियमों और अनुच्छेदों का संकलन नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यता, संस्कृति, संघर्ष और सपनों का लिखित दस्तावेज़ है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ यह संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें आज की स्थिति में 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ और 470 से अधिक अनुच्छेद हैं (संशोधनों सहित)।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय संविधान की मूल प्रति (Original Copy) अपने आप में एक अद्भुत कलात्मक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। यह न तो टाइप की गई थी, न ही किसी मशीन से छापी गई—बल्कि इसे हस्तलिखित किया गया था, वह भी अत्यंत सुंदर कैलिग्राफी में।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने न केवल एक मजबूत लोकतांत्रिक ढाँचा तैयार किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि यह दस्तावेज़ भारतीय संस्कृति की गहराई को प्रतिबिंबित करे।
डॉ. भीमराव अंबेडकर
“संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज़ नहीं, यह राष्ट्र की जीवनशैली है।”
संविधान की मूल प्रति कैसे और किसने लिखी?
भारतीय संविधान की मूल अंग्रेज़ी प्रति को हस्तलिखित किया था प्रसिद्ध कैलिग्राफर प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने। उन्होंने यह कार्य 1947 से 1949 के बीच लगभग 2 वर्षों में पूरा किया।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- संविधान की मूल प्रति कागज़ नहीं, बल्कि विशेष रूप से तैयार किए गए पर्चमेंट (Velum) पर लिखी गई।
- इसमें कुल 432 पृष्ठ हैं।
- इसमें प्रयुक्त स्याही और लेखन शैली को टिकाऊ बनाया गया ताकि यह सदियों तक सुरक्षित रहे।
- प्रेम बिहारी जी ने इस कार्य के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया, केवल अपनी हस्ताक्षर की अनुमति माँगी।
साथ ही, संविधान की मूल हिंदी प्रति को हस्तलिखित किया वसंत कृष्ण वैद्य ने। यह तथ्य भारतीय भाषाई सम्मान और सांस्कृतिक संतुलन का प्रतीक है।
महात्मा गांधी
“कोई भी संविधान तभी जीवित रहता है, जब उसमें जनता की आत्मा बसती है।”
संविधान में बनी आकृतियाँ और भारतीय संस्कृति
भारतीय संविधान की मूल प्रति की सबसे अनूठी विशेषता है उसमें बनी कलात्मक चित्रण (Illustrations)। ये चित्र केवल सजावट नहीं, बल्कि भारत की 5000 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक यात्रा को दर्शाते हैं।
चित्रों के प्रमुख स्रोत:
इन चित्रों को बनाया था नंदलाल बोस और उनके शांति निकेतन (कलाभवन) के शिष्यों ने।
इनमें दर्शाए गए हैं:
- मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता
- वैदिक युग
- रामायण और महाभारत के दृश्य
- गुप्त काल की कला
- बौद्ध और जैन परंपराएँ
- मुगल काल
- 1857 का स्वतंत्रता संग्राम
- महात्मा गांधी का दांडी मार्च
हर भाग की शुरुआत में बना चित्र उस ऐतिहासिक काल का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संविधान किसी एक धर्म, भाषा या संस्कृति का नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत का दस्तावेज़ है।
रवींद्रनाथ टैगोर
“भारत विविधताओं का नहीं, बल्कि विविधताओं में एकता का देश है।”
क्रमश: