लेखिका: शिखा तैलंग (भोपाल )
जब अयोध्या में राम लौटे, हर हृदय दीपमय हो गया!
सारांश :
लंका विजय के पश्चात श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे तो नगरवासियों में उत्सव का माहौल छा गया।
सभी स्त्री-पुरुषों ने पुष्पक विमान के दर्शन हेतु आतुरता से प्रतीक्षा की और भाव-विभोर होकर श्रीराम का स्वागत किया।
अयोध्या आगमन, श्रीराम राज्याभिषेक, पुष्पक विमान, भरत मिलन, रामायण कथा जैसी भावनात्मक घटनाएं इस वर्णन को अनुपम बनाती हैं।
आइये रावण बध के बाद श्री राम कैसे अयोध्या आये और उनका कैसे स्वागत हुआ इसके बारे में पढ़िए –
रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम लंका से पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या के लिए रवाना हुए।
उनके साथ देवी सीता, अनुज लक्ष्मण और हनुमान तथा युद्ध में राम का साथ देने वाले अन्य
योद्धागण व विभीषण विमान में बैठे ।
श्रीराम की घर वापसी का समाचार पूरी अयोध्या में फैल गया। इस खबर को सुनकर
अयोध्यावासी झूम उठे। इस नगर की महिलाएं पूजन में इस्तेमाल होने वाली पवित्र चीजें जैसे –
दही, दूब, फूल, तुलसी के नए और सुगंधित पत्ते लेकर मंगल गीतों को गाते हुए अयोध्या मे
घूमने लगीं।
उस समय अयोध्या की शोभा देखते ही बनती थी। सरयू नदी ने भी मानो नया रूप धारण कर
लिया था और उसका पानी बिलकुल साफ हो गया।
अयोध्या के नागरिक प्रभु श्रीराम को देखने के लिए बैचेन हो रहे थे। किसी को भी अपनी
सुध.बुध नहीं थी। वे विमान उतरने की जगह पर जिस हाल में थे उसी हाल में दौड़े चले जा रहे
थे। बच्चों और बुजुर्गों को घर पर ही छोड़ दिया गया ताकि श्रीराम की पहली झलक पाने से कोई
निवासी वंचित नहीं रह जाए।
नागरिक रह.रह कर बैचेन हो रहे थे। वे एक.दूसरे से पूछ रहे थे कि कहीं किसी ने श्री राम को
देख तो नहीं लिया।
श्रीराम के अयोध्या आगमन पर राजमहल में भी हलचल दिखी। गुरु वशिष्ठ श्रीराम के छोटे
भाई श़त्रुघ्न , ब्राहमणों के समूह के साथ भरत चेहरे पर मुस्कान लिए हुए काफी बैचेनी के साथ
महल से बाहर निकले।
अयोध्या की अनेक महिलाएं अपने.अपने घरों की अटारी पर चढ़कर आकाश पर नजरें गड़ाए
हुए थीं ताकि वे पुष्पक विमान की झलक देख सकें।
पुष्पक विमान के अयोध्या में उतरने के बाद लोगों के हर्ष का पारावार नहीं था। विमान के
आसपास नागरिकों का समंदर उमड़ रहा था। ऐसा लग रहा था मानो श्रीराम पूर्णिमा के चांद
हों और पूरी अयोध्या समुद्र में बदल गई थी जो अपने पूर्ण चंद्रमा को देखकर शोरगुल करती हुई
लहरों के समान बढ़ती ही जा रही थी।
महिलाएं इधर.उधर दौड़ रही थीं। उनकी आंखों में प्रेम के आंसू थे। भावनाएं छलक रही थीं। पर
वे अपनी भावनाआं को पूरी तरह नियंत्रित करने की कोशिश करती दिखती थी क्योंकि वे
जानती थी कि यह अवसर बेहद मांगलिक है और ऐसे समय में आंसू बहना अच्छा नहीं रहेगा।
श्रीराम व अन्य के विमान से बाहर आते ही उनकी सोने के थाल में कई दीपक सजाकर आरती
उतारी गई।
(क्रमशः)