रचनाकार : शबनम मेहरोत्रा कानपुर
देवों के देव महादेव
जिनकी महिमा लिख न पाए ;संत ऋषि विद्वान
कैसे उनकी महिमा लिखे ;मूढ़ मति अज्ञान
लोगों के श्री मुख से ;जो उनकी
कथा है जानी
इतना ही समझ मैं पाई ;कि वे
हैं ओढर दानी
मुझसे उनकी कथा का वर्णन ;न करना आसान,,,,,,
महाशिवरात्रि के दिन करता
जो इनका पूजन
धन धान्य से पूर्ण वो होता
पाता अनूप सुअन
इनके सारे कार्य लिखे हैं पढ़ लो शिव पुराण,,,,,,
शिव कथा का श्रवण जो
करता ;
जाता है शिव लोक
बंधन से पाता छुटकारा;
लोभ न रहता न शोक
शबनम तो अनभिज्ञ है बिलकुल
कैसे लगाए ध्यान,,,,
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चरण पादुका वंदन (गीत)
ऐसी कहॉं तकदीर हमारी तेरा दर्शन पाऊँ
अहो भाग्य गर चरण पादुका के पास मैं जाऊँ
सूक्ष्म रूप से विचरण करते
आप हमारे पास
ओझल रहते दृष्टि से पर भक्त
का थामे हाथ
कंठ में स्वर की शक्ति दे दें भजन आपका गाऊँ ,,,,,,
चरण पादुका हे गुरूवर ऊर्जा
का अनंत श्रोत
साकारात्मक ऊर्जा से हम तो
होते ओत ब प्रोत
आपकी कृपा परम असीमित शब्द नही जो गाऊँ ,,,,
ईश्वर और हमारे बीच का आप
सशक्त है माध्यम
आपके माध्यम से ईश्वर तक
कहना होता सुगम
शबनम पूरी होगी चाहत गुरुवार को जो मनाऊँ
अहो भाग्य गर चरण पादुका के पास मैं जाऊँ