यशवन्त कोठारी, जयपुर
प्रेम के पात्र के साथ तादात्मय स्थापित करना ही प्रेम में सर्वोंच्य लक्ष्य हो जाता है। महिला के लिए प्रेम ही धर्म बन जाता है। संसार में प्रेम के अलावा कुछ भी वास्वविक नहीं है। व्यक्ति प्रेम से कभी भी थकता नहीं है। प्रेम जीवन की प्रमुख अभिव्यक्तियों का श्रोत है। प्रेम ही एक ऐसी चीज है जो सर्वाधिक सार्थक है। प्रेम करने वाला कष्ट ओर विपत्तियों का सामना करता है। ओर प्रेम को वरदान मानता है। सुख का कोई भी श्रोत उतना सच्चा नहीं जितना प्रेम है। प्रेम सहनशील बनाता है। समझदार बनाता है। ओर अच्छा बनाता है। हम अधिक उद्दात्त बन जाते है।
व्यक्ति का जन्म प्रेम ओर मित्रता करने के लिए होता है। प्रेम के अमूल्य विकास में बाधा डालने वाली प्रत्येक चीज का विरोध किया जाना चाहिये। प्रेम का उन्मुक्त विकास होना चाहिये। अपने रूप को बनाये रखकर दूसरे को ऊर्जान्वित करने को ही प्रेम कहा जाना चाहिये। प्रेम से सुरक्षा की भावना बढ़ती है। प्रेम करने वाले को अपने प्रेम के पात्र के कल्याण ओर विकास मेें ही दिलचस्पी रहती है। प्रेमकरने वाला अपने साधन अपने पात्र को उपलब्ध कराता है। इससे उसे सुख मिलता है।
प्रेम सबसे सहजता से ओर परिवार की परिधी में उत्पन्न होता है। आगे जाकर पूरी मानवता को इस में शामिल किया जा सकता है। प्रेम का भाव प्रेम के पात्र तक ही सीमित नहीं रहता है। बल्कि प्रेम करने वालें के सुख तथा विकास को भी बढ़ाता है।
प्रेम पसन्द या रूचियों पर निर्भर नहीं रहता, प्रेम की गली अति संकरी या में दो ना समाये, ढ़ाई आखर प्रेम का पढ़े सौ पण्डित होय।
प्रेम का रास्ता तलवार की धार पर चलने का रास्ता हैं। विश्व की महान उपलब्ध्यिों के लिए प्रेरणा स्त्री के प्रेम से प्राप्त होती है। कालिदास नेपोलियन माइकल फैराडे के जीवन में प्रेम ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐन्द्रिय उल्लास प्रेम का फल होता है। प्रेम व्यक्ति का जीवन हो जाता है, ओर जीविका भी। प्रेम आवश्यक रूप से पसन्द या रूचियों पर निर्भर नहीं करता है। प्रेम अति भाव भी जाग्रत करता है। प्रेम एक ऐसा संवेग है जो आवेग ओर आवेश के बढ़ जाने के बाद बना रहता हैै। प्रेम केवल एक रोमांटिक भावना नहीं है। प्रेम के अधारभूत अनुभव की जड़े व्यक्तियों की आवश्यकताओं में होती है। सूत्र रूप में हम प्रेम की कल्पना एक संवंेगात्मक रूप में कर सकतेे है। वास्तव में प्रेम वैयक्तिक ओर सामाजिक दोनो प्रकार के कल्याण तथा सुख के लिए आवश्यक है। प्रेम की जटिलता को समझना आसान नहीं होता है। प्रेम के विषमलिंगी व्यक्तियों में अनुराग , लगाव रूचि ओर भावावेश होता है। ओर अन्य व्यक्ति इस क्रिया को अपने ढ़ंग से देखने के लिए स्वतंत्र होता है।
(क्रमश:)
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