रचनाकार : नीलिमा तैलंग, पन्ना (मध्य प्रदेश)
।शिखा को जमना काकी के बारे में बस इतना मालूम था कि उनके पति जानकी बाबू भी काकी को छोड़कर इस दुनिया से कूच कर गए थे।
उन दिनों जमना काकी के पति जानकी दास डाक घर में बाबू हुआ करते थे।लाख मिन्नतों और पूजा अनुष्ठानो के बाद भी जमना काकी को कोई संतान नहीं हुई थी।शायद इसी कारण जमना काकी अपना सारा लाड़ दुलार शिखा पर लुटा दिया करती थीं ।
जमना काकी के बारे में सोचते सोचते लखनऊ स्टेशन कब आ गया शिखा को कुछ पता ही नही चला । शिखा जैसे ही स्टेशन पर उतरी उसे मम्मी के द्वारा भेजा गया ड्राइवर दूर से आता हुआ दिखाई दिया ।
ड्राइवर ने शिखा का सामान उठाया और वह उसके साथ स्टेशन से बाहर खड़ी कार में बैठ गई ।लगभग आधे घंटे में शिखा अपने घर पहुंच गई ।मम्मी उसे देख कर बेहद खुश हुई ।मम्मी ने यह कहते हुए कि तू जल्दी से फ्रेश हो जा मैं तेरे लिए नाश्ता लगाती हूं ।
किंतु शिखा का मन तो जमना काकी से मिलने के लिए उतावला हुआ जा रहा था । उसने तुरंत सोच लिया कि सबसे पहले वह जमना काकी से मिलने जायेगी । फिर कुछ और करेगी।
शिखा ने जमना काकी के यहां जाने के लिए जैसे ही अपने घर का बड़ा सा गेट खोला तैसे ही उसने देखा कि जमना काकी हंसती हुईं गेट पर ही खड़ी हैं। शिखा को देखते ही जमना काकी बोल उठी “अरे बिटिया मुझे पता चल गया था कि तू आने वाली है इसलिए मैं ही तुझ से मिलने चली आई।कितनी कमजोर हो गई है ।वहां विदेश में जरूर घर जैसा खाना नहीं मिलता होगा “।शिखा हंसते हुए जमना काकी को अंदर ले आई ।उसने देखा कि मम्मी उसके लिए पहले ही चाय नाश्ता रख चुकी हैं और अब शायद खाना बनाने में व्यस्त हो गई हैं।
जमना काकी ने अपने हाथ में पकड़े हुए बड़े से पैकेट को शिखा को देते हुए कहा कि “ले बिटिया ये तेरे मन पसंद काले रंग की सिल्वर बॉर्डर वाली साड़ी । मैं तुझे शादी में तो नहीं दे सकी।इसलिए अब ले आई हूं “। शिखा ने हंसते हुए पैकेट में से साड़ी निकाल कर बड़े ही प्यार से अपने पास रख ली।
शिखा ने अपनी चाय को आधी करके जमना काकी को देते हुए अपने साथ लाए हुए बिस्कुट भी प्लेट में रख दिए ।जमना काकी शिखा से बातें करते हुए धीरे धीरे चाय पीते हुए बिस्कुट खाने लगीं।
शिखा ने मम्मी को आवाज देते हुए उनको जमना काकी के आने की सूचना दी ।किंतु जमना काकी “फिर आऊंगी” कह कर जाने के लिए खड़ी हो गईं ।शिखा उनको गेट तक छोड़ आई।
शिखा जैसे ही वापिस आई मम्मी उसके पास बैठ गईं ।शिखा ने बताया कि जमना काकी उससे मिलने आई थीं और उसे यह सुंदर साड़ी दे गई हैं।
मम्मी उसकी तरफ देखते हुए बोलीं “कैसी बातें करती हो बेटी ??जमना काकी को गुजरे हुए तो दो महीने बीत गए ।
मम्मी से यह सुनते ही शिखा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया ।तो फिर क्या “वह” जमना काकी की आत्मा थी जो शिखा से मिलने आई थी?? शिखा की नजर उस चाय के आधे भरे हुए कप और बिस्कुट पर अटक गई जो जैसे के तैसे ही रखे हुए थे। किंतु वह सिल्वर बार्डर वाली काली साड़ी उसकी अभी तक की भूत को न मानने वाली सभी मान्यताओं और विश्वास को झुठला रही थी….
(काल्पनिक कहानी)