रचनाकार: जयंती, पश्चिमगाँव (यूपी)
धीरे धीरे मेरा डर भी कम होने लगा और मैं धीरे धीरे खुलती गई। मैं नटखट और बातूनी लड़की थी और मास्टर जी बहुत कम बोलते थे।
पढ़ाई के साथ- साथ मैं इधर- उधर की बातें भी करनी शुरू कर देती तो मास्टर जी कहते इसीलिए तुम्हारे हाईस्कूल में कम नंबर आए हैं जो तुम इतनी बातें करती हो। मैं झेंप जाती तो मास्टर जी हल्का सा मुस्कुरा देते।
ऐसे ही पढ़ते हुए मुझे एक साल बीत गया और इण्टर फास्टियर में मेरे अच्छे नंबर आए l
जब मै इण्टरमीडिएट में पहुंची तो मेरी किशोरावस्था थी।यह उम्र तो तूफानी अवस्था होती है इस उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षक भी बढ़ता है। मुझे भी मास्टर जी अच्छे लगने लगे। मुझे भी उनसे धीरे – धीरे प्यार होने लगा।अब मैं उनके कमरे में ज्यादा आने- जाने लगी। कभी कुछ सवाल पूछने के बहाने, कभी खाना देने के बहाने,कभी जूठे बरतन उठाने के बहाने।
मै हिम्मती थोड़ी लड़की थी, इसलिए मैने एक दिन फैसला किया कि आज मै मास्टर जी को बताऊंगी कि मै उनके लिए क्या महसूस करती हूं।
जैसे ही मास्टर जी विद्यालय से आए मै अपनी किताबें लेकर उनके कमरे में पहुंच गई, मास्टर जी ने मुझे देखा और कहा सुहानी थोड़ी देर बाद आना। मैने कहा नही सर मुझे अभी पढ़ना है तो वो बोले बच्चों की तरह जिद मत करो अभी जाओ। मैने कहा एक पाठ मुझे समझ नही आ रहा है इसलिए मुझे अभी समझना है , तो वो बोले अच्छा कौन सा है दिखाओ मुझे? मैने कहा आप मुझे अच्छे लगते हो, मै आपको पसंद करती हूं। वो कुछ नही बोले मुझसे कहा अभी जाओ और दरवाजा बंद कर लिया।
उस दिन न मै पढ़ने गई और न खाना देने। दूसरे दिन मै पांच बजे पढ़ने गई तो उन्होंने पहले के जैसे ही पढ़ाया जैसे कुछ हुआ ही न हो। मैने भी चुपचाप पढ़ाई की और चली आई। काफी दिन बीत गए, इस बारे मे कोई बात नही हुई।मैने उनकी चुप्पी को मौन स्वीकृति समझ लिया। एक दिन मैने पूछा सर, मै इतना बकबक करती हूं आप कुछ बोलते नही मैं आपको पागल लगती हूं क्या? तो वो बड़े प्यार से बोले नही मुझे तुम्हारी बातें सुनना अच्छा लगता है, तुम बोलते और हंसते हुए ही अच्छी लगती हो। मै ये सुन कर बहुत खुश हुई।
धीरे धीरे परीक्षा के दिन नजदीक आ गए, मास्टर जी ने पढ़ाने में और मैने पढ़ने में बहुत मेहनत की। अतः हम दोनों की मेहनत रंग लाई और मै बारहवीं में प्रथम श्रेणी से पास हुई । मम्मी ने कहा सुहानी लो मास्टर जी को मिठाई खिला कर आओ उन्ही की मेहनत है जो तुम्हारे इतने अच्छे नंबर आए हैं। मै मिठाई लेकर उनके कमरे में गई ,तो उन्होंने मेरे हाथ से मिठाई लेकर मुझे खिलाया और कहा मिठाई की हकदार तुम हो,ये तुम्हारी ही मेहनत है।
फिर गर्मी की छुट्टियां हुई और मास्टर जी अपने घर चले गए। वैसे तो हर बार गर्मी की छुट्टियों में मास्टर जी अपने घर जाते थे पर इस बार मुझे बड़ी बेसब्री से इंतजार था छुट्टियां खतम होने का और उनके वापस आने का। एक दिन शर्मा अंकल मेरे घर पापा से मिलने आए,तो उनकी बातो- बातो से पता चला कि मास्टर जी शादीशुदा हैं। मेरे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और मेरी आँखो के सामने अंधेरा छा गया, मै लड़खड़ा गई गिरते गिरते बची।
क्रमशः
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