रचनाकार: जयंती, पश्चिमगाँव (यूपी)
एक दिन शर्मा अंकल मेरे घर पापा से मिलने आए,तो उनकी बातो- बातो से पता चला कि मास्टर जी शादीशुदा हैं। मेरे तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और मेरी आँखो के सामने अंधेरा छा गया, मै लड़खड़ा गई गिरते गिरते बची।
मम्मी पूछने लगी क्या हुआ मेरी आँखो में आंसू भर आए, मैने कहा कुछ नही बस पैर फिसल गया था और मै अपने कमरे में चली गई, वहां फूट – फूट कर रोने लगी। मैं पूरा दिन पूरी रात रोई, दूसरे दिन जब मै सुबह नही उठी तो मम्मी पूछने लगी क्या हुआ तो मैने कहा सिर दर्द हो रहा है, मम्मी ने दवाई दी और कहा आराम करो।
दो तीन दिन मै बहुत दुखी रही फिर मेरा दुःख गुस्से में बदलता चला गया, मैं अब और बेसब्री से मास्टर जी के वापस लौटने का इंतजार करने लगी, मेरे मन में बहुत से सवाल थे जिनका जवाब मुझे मास्टर जी से लेने थे।
धीरे- धीरे गर्मी की छुट्टियां खत्म हुई और मेरा इंतजार खत्म हुआ, मास्टर जी आए अपने कमरे में गए मै भी उनके पीछे से उनके कमरे मे गई मेरी आँखों में गुस्सा देख कर बोले क्या हुआ? मैने पूछा क्या आप शादीशुदा हैं?तो उन्होंने अपना सिर नीचे कर लिया और बोले हां।बस इतना ही सुनना मेरे लिए काफ़ी था, मैं उनके ऊपर बरस पड़ी।
मैंने उनके कमरे का सारा सामान इधर उधर फेंक दिया उनकी सारी किताबें फाड़ दी और रोते हुए कहने लगी आपने मेरी भावनाओं से खेला है आपको शर्म नहीं आती,अरे!मै नासमझ थी आप तो समझदार थे, आपको मुझे उसी वक्त रोकना चाहिए था, आप क्यो चुप रहे, आपने क्यों नही बताया कि आपकी शादी हो चुकी है मैं इसी तरह चिल्लाती रही और वो चुपचाप मेरी बाते सुनते रहे।
जब मै रो कर शान्त हुई तो वो उठे और अपनी अलमारी खोल कर उससे एक एल्बम निकाल कर लाए और मेरे सामने रख दिया, वह उनकी शादी का एल्बम था। मास्टर जी ने मुझे पहला पृष्ठ दिखाया और बोले ये शालिनी है मेरी पत्नी। अब से पांच साल पहले मेरा इससे विवाह हुआ था फिर एक साल बाद ही खुशखबरी मिली कि शालिनी पेट से है लेकिन सातवें महीने शालिनी का पैर फिसला और वो गिर गई उसे अस्पताल ले जाया गया,लेकिन डाक्टर शालिनी और बच्चे में से किसी को नही बचा पाए। तब से मै अकेला हूं।
इतना कहकर उनकी आँखें भर आई। और मुझसे बोले मुझे माफ़ कर देना मैने तुम्हारा दिल दिखाया है। इतना सुनते ही मै बिल्कुल शांत हो गई मेरी आँखों से आंसु बहने लगे। मैने कहा नही सर, मुझे माफ कर दीजिए मैंने बिना सोचे समझे पता नहीं आपको क्या क्या कह दिया, उन्होंने मेरे आंसु पोछे और गले से लगा लिया। हम दोनों खूब रोए, रो धोकर सारे गिले शिकवे मिटा दिए।
अब हमारे खुशहाल जीवन के पन्द्रह साल बीत गए है और हम पति – पत्नी से दो बच्चों के माता- पिता बन गए हैं।
(काल्पनिक रचना)